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पॉलीटेक्नीकों और इंजीनियरी महाविद्यालयों के साथ ही,बाजार के दूसरे खण्डों जैसे व्यावसायिक संस्थाओं,उद्योग,जन-सेवा संगठनों,व्यावसायिक शिक्षा और सामान्यतः सामुदायिक संस्थानों को मानव संसाधन विकास हेतु अब और अधिक सहायता की आवश्यकता है। राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (एन.आई.टी.टी.टी.आर.),भोपाल ने तकनीकी शिक्षा प्रणाली में नवाचारों के अतिरिक्त विकासशील देशों में भी रोजगार की माँगों के अनुरूप व्यापक आवश्ययकताओं को पूरा करने के लिए अपनी क्षमताओं को प्रदर्शित किया है। संस्थान, अपने वर्धित अधिदेश के साथ,अब देश की तकनीकी शिक्षा प्रणाली के सम्पूर्ण विकास और प्रसार हेतु एक प्रमुख साधन सम्पन्न संस्था एवं एक श्रेष्ठ केन्द्र बन गया है तथा इसका विस्तृत रूप से विविध श्रम-बाजार को सहयोग देने के लिए उत्तरदायित्व और बढ़ गया है।
 
संस्था ने निरंतर अनुसंधान एवं विकास द्वारा मान व संसाधन विकास, पाठ्‌यचर्या विकास, शिक्षा सामग्री की रूपरेखा एवं विकास, शैक्षिक प्रबन्ध कौशल, नीति निर्धारण, सतत्‌ शिक्षा, छात्र-मूल्यांकन, बहु-माध्यमी (मल्टीमीडिया) विकास, सामुदायिक नेटवर्किंग,औद्योगिक सम्पर्क तथा तकनीकी शिक्षा अनुसंधान के क्षेत्र में सविज्ञता प्राप्त कर ली है।
 
राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल का तकनीकी शिक्षा में अनेक नई प्रणालियाँ आरंभ करने का एक उत्कृष्ट सफल कीर्तिमान रहा है और उसने अपने विभिन्न ग्राहकों के लिए कई समयबद्ध और व्यावसायिक रूप से चुनौतीपूर्ण परियोजनाओं को सफलतापूर्वक कार्यान्वित किया है। नब्बे के दशक में, संस्थान ने तकनीशियन शिक्षा प्रणाली को समृद्ध बनाने वाली अत्यन्त अभिनन्दित एवं सफल विश्व बैंक सहायित परियोजनाओं यथा : टेक एड एक और दो को लागू करने में ग्राहक राज्यों को सफलतापूर्वक सहायता की | इस परियोजना का तीसरा चरण, टेक एड तीन उत्तर-पूर्वी राज्यों में अब लागू किया जा रहा है जिसमें संस्थान अरूणाचल प्रदेश और नागालैंड राज्यों को एक शैक्षिक परामर्शदाता के रूप में माँग-आधारित व्यापार ग्राहकी सहायता प्रदान कर रहा है।

मानव संसाधन विकास मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा नियुक्त भिन्न समीक्षा समितियों को अनुशंसा के आधार पर संस्थान को उन्नत किया गया है और राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान(एन.आई.टी.टी.टी.आर.),भोपाल के रूप में उसका पुनर्नामकरण किया गया है। इससे संस्थान के अधिदेश में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ। जिससे यह अब क्षेत्रीय सीमाओं से परे तकनीकी शिक्षा के सम्पूर्ण क्षेत्र में राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक साधन सम्पन्न संस्था के रूप में कार्य कर सकता है।

पिछले कई वर्षों में राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल की गतिविधियों के स्वरूप में ''शिक्षक उन्नयन'' के मूल सिद्धान्त से आगे बहुत अधिक विस्तार हो गया है और तकनीकी शिक्षा प्रणाली की परिवर्तनशील अपेक्षाओं की तुलना में परिवर्तनशील श्रम-बाजार की मांग को पूरा करने के लिए उसमें बहुत बड़ी भूमिका मे बदलाव हुआ है। राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल ने तकनीकी शिक्षा में गुणवत्ता लाने की बढ़ती हुई माँग का पूरा निर्वाहन करने हेतु अन्य उत्कृष्टता वाले केन्द्रों के साथ नीतिगत सहयोग एवं नेटवर्किंग से आधुनिक संसाधनों और ढांचागत सुविधाओं से अपने आप को अनुकूल बना लिया है। जिस पर राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान, भोपाल में संचालित एक कार्यशाला में मानव संसाधन विकास मंत्रालय एवं अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा जोर भी दिया गया था। अधिदेश में महत्वपूर्ण परिवर्तन हुआ। जिससे संस्थान क्षेत्रीय सीमाओं से परे तकनीकी शिक्षा के संपूर्ण क्षेत्र में राष्ट्रीय और अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक साधन सम्पन्न संस्था के रूप में कार्य करने के योग्य हो गया है।

 विस्तार  केन्द्र  पुणे , अहमदाबाद ,रायपुर और पणजी (गोवा) में

ग्राहक राज्यों में सभी कार्यक्रमों और परियोजनाओं के कारगर कार्यान्वयन के लिए राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान ने प्रत्येक राज्यों में चार विस्तार केन्द्रों की स्थापना की है। विस्तार केन्द्र अहमदाबाद (गुजरात); पुणे (महाराष्ट्र) और पणजी (गोवा) और रायपुर (छत्तीसगढ) में स्थित हैं।

 

 

 राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान , भोपाल का पुणे स्थित विस्तार केन्द्र

      राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान के इन विस्तार केन्द्रों की स्थापना निम्नलिखित उद्‌देश्यों को पूरा करने के लिए की गई थी :

  • तकनीकी (और व्यावसायिक) शिक्षा प्रणालियों, वाणिज्य और उद्योग से संबद्ध राज्य पदाधिकारियों के साथ संपर्क साधना।
  • इंजीनियरी महाविद्यालयों, पॉलीटेकनीकों और व्यावसायिक संस्थानों के प्राचार्यों तथा संकाय सदस्यों के साथ घनिष्ठ कार्यात्मक संबंध स्थापित करना।
  • परिवर्तन-प्रतिनिधि के रूप में काम करने के लिए तकनीकी संस्थाओं के कार्मिकों हेतु मा.सं.वि. गतिविधियां प्रारंभ करना।
  • उत्कृष्टता केन्द्र बनने में स्वायत्त संस्थानों को प्रेरित करना और सहायता करना।
  • परस्पर हितार्थ उद्योगों के साथ साझेदारी स्थापित करना और प्रोत्साहन देना।
  • ग्राहक राज्यों के सर्वोत्तम लाभ के लिए मूल संस्थान (रा.त.शि.प्र.अनु.सं.) द्वारा प्रारम्भ किए गए अभिनव परिवर्तनशील विकास, शिक्षा-सुधारों, कार्यक्रमों एवं परियोजनाओं को पूरा करना।