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विभाग

संस्थान के संगठनात्मक ढाँचान्तर्गत अभियांत्रिकी/विज्ञान एवं शिक्षा विभाग, शिक्षा-प्रौद्योगिकी केन्द्र तथा संस्थागत एवं सामाजिक विकास केन्द्र हैं। इनका परिचालन विभागाध्यक्षों/केन्द्राध्यक्षों द्वारा किया जाता है जो निदेशक के प्रति उत्तरदायी होते हैं। आंतरिक सलाहकारी समिति, जिसमें वरिष्ठ प्राध्यापकगण (विभागाध्यक्ष/केन्द्राध्यक्षगण) होते हैं, शैक्षिक विषयों में निदेशक को सहयोग देती है। इसके अतिरिक्त विविध समितियाँ विभिन्न प्रशासन संबंधी एवं प्रबंधक संबंधी कार्यों को निष्पादित करके संस्थान के निर्विध्न संचालन में प्रबंधन की सहायता करती है।

इस संगठनात्मक संरचना की सहायता से कार्य संचालन कार्य दल तथा परियोजना दल आधारित दृष्टिकोण पर आधारित है। संरचना ग्राहकों की विभिन्न परिवर्तनशील माँगों को पूरा करने और अपनी वृद्धि तथा विकास हेतु अपने आप में गतिकता बनाए रखने के लिए पर्याप्त अनुकूल एवं लचीली है। यह तकनीकी शिक्षा प्रणाली की अपेक्षाओं, उद्योगों में प्रौद्योगिकी विकास और समुदाय के सामाजिक- आर्थिक विकास के प्रति अति संवेदनशील है। यह सामूहिक कार्य में निरंतर सुधार, व्यावसायिकता तथा संकाय एवं कर्मचारी वर्ग में सुयोग्यता के लिए एकाग्रचित्त है। प्रत्येक संकाय सामान्यतः किसी एक ही समय में दो से तीन कार्यक्रम/टीम में कार्य करता है।